कुँवर बेचैन

Dr kunwar bechain ki kavita

उसने मेरे छोटेपन की  इस तरह इज्जत रखी मैंने दीवारें उठाईं उसने उनपर छत रखी क्यूँ हथेली की लकीरों से हैं आगे उँगलियाँ रब ने भी कि…

कुँअर बेचैन के गीत

उँगलियाँ थाम के खुद चलना सिखाया था जिसे राह में छोड़ गया राह पे लाया था जिसे उसने पोंछे ही नहीं अश्क मेरी आँखों से मैंने ख…

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