अशोक चक्रधर की व्यंग्यात्मक कविता
🎭 कोई जुगत करो जीने की- अशोक चक्रधर चौराहे पर हुई लाल बत्ती, मैंने स्टेयरिंग से हटाई हथेली। जैसे ही कार का शीशा खोला— एक आ…
🎭 कोई जुगत करो जीने की- अशोक चक्रधर चौराहे पर हुई लाल बत्ती, मैंने स्टेयरिंग से हटाई हथेली। जैसे ही कार का शीशा खोला— एक आ…
अगर आप फ्रीलांसिंग करना चाहते हैं और आपकी डाटा एनालिसिस में आपकी अगर थोड़ी पकड़ है तो आप डाटा एनालिसिस करके काफी अच्छे प्रोजेक्…
हेलो फ्रेंड्स अगर आप फ्रीलांसिंग करते हैं और आप को पहले क्लाइंट ढूंढने में काफी दिक्कत हो रही है तो आज मैं इस पोस्ट के माध्यम…
यदि आप एक स्टूडेंट हैं और यहां पर गृहणी हैं जो की पार्ट टाइम काम करके कुछ पैसा कमाना चाहते हैं और रेगुलर कमाना चाहते हैं तो आज …
भाइयों को खो करके राखियां भी मौत वाला फंदा बन शत्रु के गले में पड़ जाता है हाथ मेहंदी रचाए अं…
मित्रों एक बार की बात है शिव और पार्वती कैलाश पर्वत पर बैठे थे । शिव ध्यान मग्न थे तभी अचानक से पार…
कुल की परंपरा मर्यादा निभाई जाना बेटी कुल की परंपरा मर्यादा निभाया जाना बेटी जब सास ससुर घर जाओ मत लूटो और लुटाओ अपने बचपन …