उसने मेरे छोटेपन की इस तरह इज्जत रखी
मैंने दीवारें उठाईं उसने उनपर छत रखी
क्यूँ हथेली की लकीरों से हैं आगे उँगलियाँ
रब ने भी किस्मत से आगे आपकी मेहनत रखी
किसी भी काम को करने की चाहें पहले आती हैं
अगर बच्चे को गोदी लो तो वाहें पहले आती हैं
हर एक कोशिश का दर्जा कामयाबी से भी ऊँचा है
कि मंजिल बाद में आती है राहें पहले आती हैं .
अपने आँचल को भिगोती ही चली जाती है
जिन्दगी रोई तो रोती ही चली जाती है
नेक कामों में देर न कीजिये साहिब
अगर देर होती है तो होती ही चली जाती है
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पूरी धरा भी साथ दे तो और बात है
पर तू जरा भी साथ दे तो और बात है
चलने को एक पाँव से भी चल रहे हैं लोग
पर दूसरा भी साथ दे तो और बात है
दिल में मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना
जैसे बहते हुए पानी में हो पानी लिखना
कुछ भी लिखने हुनर गर तुझे मिल जाए
इश्क को अश्क के दरिया की जुबानी लिखना
क्या है सूरज तेरी औकात है इस दुनिया में
रात के बाद भी एक रात रात है इस दुनिया में
शाख से तोड़े गये फूल ने यह हस के कहा
अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में
तुम ही भरी बहार से आगे निकल गये
तुम मेरे इन्तजार से आगे निकल गये
मैं पीछे तुम्हारे बड़ी दूर तक गयी
तुम ही मेरी पुकार से आगे निकल गये
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सांचे में हमने और के ढलने नही दिया
दिल मोम का है दिल भी पिघलने नही दिया
चेहरे को आज तक भी तेरा इन्तजार है
हमने गुलाल और को मलने नही दिया
याद आई उनकी और मुझे फिर रुला दिया
मैं कैसे मान लूँ के उन्हें अब भुला दिया
सावन में वो न आये तो मैंने यही किया
झूले पर उनका नाम लिखा और झुला दिया
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नदी बोली समंदर से मैं तेरे पास आई हूँ
मुझे भी गा मेरे शायर मैं तेरी ही रुबाई हूँ
मुझे ऊँचाइयों का वो अकेला पन नहीं भाया
लहर होते हुए भी तो मेरा आँचल न लहराया
मुझे बाधे रही ठन्डे बरफ की रेशमी काया
बड़ी मुश्किल से बन निर्झर उतर पायी मैं धरती पर
छुपा के रख मुझे सागर पसीने की कमाई हूँ
नदी बोली समंदर से मैं तेरे पास आई हूँ
पहन कर चाँद की नथुनी सितारों से भरा आँचल
नये जल की नईं बूंदें नये घुंगरू नयी पायल
नया झूमर नई टिकुली नई बिंदिया नया काजल
पहन आई मैं हर गहना की तेरे साथ ही रहना
लहर की चूड़ियाँ पहना मैं पानी की कलाई हूँ
नदी बोली समंदर से मैं तेरे पास आई हूँ ......
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रोज जब घूमने जाता हूँ नीम की पत्तियाँ चबाता हूँ
जितनी कड़वाहटे हैं इस दुनिया में
मैं उन्ही को दवा बनाता हूँ
कुंवर बेचैन

