बढ़ रहा है प्रजनन विकारों का खतरा, रोजमर्रा की ये आदतें बन सकती हैं बड़ी वजह:
पिछले कुछ वर्षों में प्रजनन से जुड़ी समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और खान-पान की खराब आदतें लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, जिसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई दे रहा है।आम तौर पर समाज में प्रजनन से जुड़ी समस्याओं के लिए महिलाओं को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या पुरुषों में भी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग हर छह में से एक दंपति को गर्भधारण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।आइये इस लेख में इनफर्टिलिटी के कारणों का विश्लेषण करते हैं।
इनफर्टिलिटी क्या होती है:
विश्व स्वास्थ्य संगठन W.H.O. के अनुसार, यदि कोई दंपति एक साल तक नियमित संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता है, तो इस स्थिति को इनफर्टिलिटी (Infertility) कहा जाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि खराब जीवनशैली, बढ़ता तनाव, असंतुलित खान-पान और अधिक उम्र में शादी जैसे कई कारण प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।आजकल युवाओं में हार्मोनल असंतुलन, शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी और ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि समय रहते कारणों को समझकर जीवनशैली में सुधार किया जाए तो कई मामलों में इन समस्याओं से बचाव संभव है।
30 साल के बाद शादी भी बन सकती है कारण:
आज के दौर में पढ़ाई, करियर और आर्थिक स्थिरता के कारण लोग देर से शादी और गर्भधारण की योजना बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारण हो सकता है।उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में अंडों की संख्या और गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसी तरह पुरुषों में भी उम्र बढ़ने के साथ शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। यहाँ यह जानना आवश्यक है की बढती उम्र स्त्री और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालती है, प्रजनन से जुडी समस्याओं में समाज अधिकांशतः स्त्रियों को जिम्मेदार मान लेता है ।
आधुनिक लाइफस्टाइल का पड़ रहा असर:
आज की बदलती लाइफस्टाइल ने लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। अत्यधिक जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन शरीर में पोषण की कमी पैदा कर सकता है।इसके कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा जंक फूड और असंतुलित खान-पान से मोटापे का खतरा भी बढ़ता है, जिसे प्रजनन संबंधी समस्याओं का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है।
तनाव और नींद की कमी भी बन सकती है वजह:
लगातार मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना भी प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। तनाव की स्थिति में शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे प्रजनन से जुड़े हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं।इसके अलावा धूम्रपान और शराब का सेवन भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। कई शोधों में पाया गया है कि धूम्रपान पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को कम कर सकता है।महिलाओं में धूम्रपान अंडाशय की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है।
पर्यावरण भी डाल रहा असर:
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण और रसायनों के अधिक संपर्क में आना भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।ऐसे में बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य के लिए संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को कम करना बेहद जरूरी माना जाता है।आजकल खेती में भीरसायनों का प्रयोग अत्यधिक मात्रा में हो रहा है , और कई हानिकारक रसायन पैकेज्ड फ़ूड आइटम्स से लेकर डेली इस्तेमाल होने अन्य वस्तुओं में जाने अनजाने हम लोग consume कर रहे हैं जो की स्वास्थ के लिए अनुचित हैं ।
