जिन्होंने हंस कर देदी जान देशभक्ति कविता -सुदीप भोला



jinhone has kar de di jaan
जिन्होंने हँस कर दे दी जान

badhai bharat maa ki shaan
बढ़ाई भारत माँ की शान

tirange ka rakha samman
तिरंगे का रक्खा सम्मान

Mai tujhse puchhu hindustan
मैं तुझसे पूँछू हिन्दुस्तान

bta de mere hinsustan unhe ham kya de paye ,
बता दे मेरे हिंदुस्तान उन्हें हम क्या दे पाये

unhe ham kya de paye.....
उन्हें हम क्या दे पाये...

kyo shaheed ki bahen bechti lal kile par chai
क्यों शहीद की बहन बेचती लाल किले पर चाय

unhe ham kya de paye
उन्हें हम क्या दे पाये

jinhone todi sab zanjeer
जिन्होंने तोड़ी सब जंज़ीर

unki dekho to takdeer
उनकी देखो तो तक़दीर

nikali sansad se tasweer
निकाली संसद से तस्वीर

bana li aazadi jageer
बना ली आज़ादी जागीर

unke bacho ke bache bhi bhuke sote haye,
उनके बच्चों के बच्चे भी भूखे सोते हाय

unhe ham kya de paye,
उन्हें हम क्या दे पाये

unhe ham kya de paye..............
उन्हें हम क्या दे पाये.....

dhadak rahe the jinke man me desh bhakti shole
धधक रहे थे जिनके मन में देश भक्ति के शोले

kitne seedhe kitne sache kitne man k bhole
कितने सीधे कितने सच्चे कितने मन के भोले

dhule jaise lagte the wo pahn basanti chole
दूल्हे जैसे लगते थे वो पहन बसंती चोले

aapni dulhan azaddi h jate jate bole
अपनी दुल्हन आज़ादी है जाते जाते बोले

jinki mot bani tyohar
जिनकी मौत बनी त्यौहार

yugo tak ho gi jay jay kar
युगों तक होगी जय जय कार

gagan se ucha tha kirdaar
गगन से ऊँचा था किरदार

dhara par aaye the awatar
धरा पर आये थे अवतार

fansi ki barmala pahne mand mand muskaye
फांसी की वरमाला पहने मंद मंद मुस्काय

unhe ham kya de paye,
उन्हें हम क्या दे पाये

unhe ham kya de paye...........
उन्हें हम क्या दे पाये

matrabhumi par tan man dhan kar dete balihari
मातृभूमि पर तन मन धन कर देते बलिहारी

jinke ek janm ham sab k lakh janm par bhari
जिनके एक जन्म हम सब के लाख जन्म पर भारी

ham unko kya de sakte kya okat hamri
हम उनको क्या दे सकते हैं क्या औकात हमारी

kuch muawja ek nokri ek makan sarkari
 कुछ मुआवजा एक नौकरी एक मकान सरकारी

jinke ang ang the bhang
जिनके अंग अंग थे भंग

magar jo thame rahe tirang
मगर जो थामे रहे तिरंग

bha kar apne khun ki gang
बहा कर अपने खून की गंग

akhiri dam tak lad gaye jang
आखिरी दम तक लड़ गए जंग

sach kahta hu wahi tare h ganga wahi
 nahaye
 सच कहता हु वही तरे हैं गंगा वही नहाय

unhe ham kya de paye,
उन्हें हम क्या दे पाय

unhe ham kya de paye..........
उन्हें हम क्या दे पाय....

ma ke hath ki roti chodi
माँ के हाथ की रोटी छोड़ी

jail ki roti khai
जेल की रोटी खायी

hatho me hathkadiya pahni
हाथों में हथकड़ियाँ पहनी

rakhi na bandh pai
राखी न बंध पायी

aazadi k meethe sapno wali eid manai
आजादी के मीठे सपनो वाली ईद बनाई

gahr ghar ho jaye deewali esi alag jagai
 घर घर हो जाए दीवाली ऐसी अलख जगाई

kabhi dekho unke pariwar
कभी देखो उनके परिवार

kone kone me hai andiyar
कोने कोने में है अंधियार

jaha h budi ma beemar
जहाँ है बूढी माँ बीमार

jaha ek pita bahut lachar
जहाँ एक पिता बहुत लाचार

jinke ghar 15 august ko bijli kat di jaye
जिनके घर 15 अगस्त को बिजली काट दी जाय

unhe ham kya de paye,
उन्हें हम क्या दे पाय

unhe ham kya de paye..........
उन्हें हम क्या दे पाय....

cricket ke maidan me besak puruskar barsado
क्रिकेट के मैदान में बेसक पुरूस्कार बरसादो

filmi nayak naiko par dolat khub luta do
फ़िल्मी नायक नायिकाओ पे दौलत खूब लूटा दो

lekin usko kya uttar dena h mujhko aajbata do
लेकिन उसको क्या उत्तर देना है मुझको आज बतादो

hemaj ki maa kahti h bete ka sir la do
हेमराज की माँ कहती है बेटे का सर ला दो

sherni laga rahi hunkar
शेरनी लगा रही हुंकार


abhi usne na mani har
अभी उसने न मानी हार

desh par putr kiya balihar
देश पर पुत्र किया बलिहार

kar rahi pote ko taiyar
कर रही पोते को तैयार

are  jo ma bharat ma ki khatir ban gai
panna dhai
अरे जो माँ भारत माँ के खातिर बन गयी पन्ना धाय

unhe ham kya de paye,
उन्हें हम क्या दे पाय

unhe ham kya de paye...............
उन्हें हम क्या दे पाय......


-सुदीप भोला


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