राजनीति पर कटाक्ष करती हिंदी हास्य कविता - सुदीप भोला

सुदीप भोला जी ने पैरोडी गीतों के माध्यम से देश की राजनीति पर बेजोड़ कटाक्ष किये हैं। उनके द्वारा रचित पैरोडी गीतों में व्यंग की जो धार होती है वह सबको आंनदित करती है। प्रस्तुत पैरोडी गीत सुदीप भोला जी का प्रसिद्ध राजनीतिक कटाक्ष भी है। आप इसे पढिये और इसका आनंद लीजिये।


किस कदर हुजुर आजकल खोखले किरदार हो गये
जिस रोग के विशेषज्ञ थे उसी रोग का शिकार हो गये
जांच कर रहे थे वो एक विशेष घटना की
जाँच जब हई पूरी तो खुद ही गिरफ्तार हो गये



कारवां की बात करें मंजिलों की बात करें
सड़के बनाई नही What is this
आते ही चुनाव इनकी देशभक्ति जाग जाती
जाते ही चुनाव वायदे टांय टांय फिस्स्स्स
पहले तो यह बोलते हैं आई लव यू
बाद में यह पूछते हैं कौन है वे तू

पल पल में बदलती इनकी भाषा देखिये
भ्रष्ट लोकतंत्र का तमाशा देखिये -2
शकुनी नें फ़ेंक दिया पासा देखिये
भ्रष्ट लोकतंत्र का तमाशा देखिये
पॉवर का मिसयूज़  हुआ हर करैक्टर लूज हुआ
न्याय का तराजू कंफ्यूज हो गया

आजादी भी  Fake हुई जनता mangoshake हुई
आदर्शो का tubelight फ्यूज हो गया
कुर्सी हई मल्लिका विपाशा देखिये,
अस्सी की उमर में अभिलाषा देखिये,
आजादी की नई परिभाषा देखिये,
भ्रष्ट लोकतंत्र का तमाशा देखिये -2
         

लालटेन वा बुझ गया रे मेरा हवा के झोंके से
भाजपा ने फूंक दिया हाय रे धोके से

जैसे तैसे सैटल किया था अपने टॉपर बेटों को
चारा कटने से पहले ही छीन लिया सब खेतों को
मेरा यार रुण्ठ गया हाय तौवा गठबंधन टूट गया हाय तौवा।
टूटा गठवन्धन जैसे लिट्टी का चोखे से

भाजपा ने फूंक दिया हाय रे धोके से

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 Youtube Link :https://youtu.be/BpSQ4RpyjZo
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