हिंदी हास्य कविता नेता जी का भाषण - महेंद्र अजनबी

कोई कोई नेता भाषण देते देते इतना एक्सपर्ट हो जाता है की बो किसी भी विषय पर बोल सकता है जिसका यूज़ कुछ पता नही न हो.मेरे मुहल्ले में एक वाटर टैंक बना. उसका उदघाटन करने के लिए एक नेता जी आय
उन्होंने जो मजेदार भाषण दिया  वो कुछ इस तरह है-

भाइयो यह जो आप वाटर टैंक देख रहे हैं इसमें वाटर भरा जाएगा
टैंक तो हमारी फ़ौज में भी होते हैं  पर उसमे वाटर नही भरा जाता

वाटर यानी पानी ,पानी दो प्रकार का होता है एक साफ़ पानी दूसरा गन्दा पानी
गंदे पानी में कमल खिलता है कमल एक फुल होता है फुल तो गुलाब का भी होता है गुलाब के फुल से गुलकंद बनता है. गुलकंद पेट साफ़ करता है. पेट तो खरबूजा भी साफ़ करता है खरबूजा खाबूजे को देखकर रंग बदलता है रंग सबसे बढ़िया जर्मनी के होते हैं जर्मनी वो जहाँ हिटलर हुआ था हिटलर वो जिसने बार की थी बार आठ प्रकार के होते हैं सोमवार मंगलवार बुधवार बृहस्पतवार शुक्रवार शनिवार रविवार और वर्ल्डवार
वर्ल्ड यानी दुनिया दुनिया गोल है गोल तो रसगुल्ला भी होता है रसगुल्ला खाने से प्यास लगती है प्यास को पानी बुझाता है पानी को अंग्रेजी में वाटर कहते हैं और उसी के लिए वाटर टैंक बनाया गया है....

हास्य  व्यंग कविता

एक कवी सम्मलेन में सुनने वालो ने इस तरह से हूट कर डाला
की हादसे से निकल गया मेरे दिमाग का दिवाला

तबसे बिना निमंत्र्ण के ही हर प्रोग्राम में पहुँच जाता हूँ
हालत इतनी खराब है जहाँ भी लोगो की भीड़दिखती है कवी सम्मलेन समझ कर घुस जाता हूँ
कभी तो स्कूल जाकर बच्चों को कवितायें सुनाने लगता हूँ
कभी मंच से ही हिस्ट्री पढ़ाने लगता हूँ
एक बार तो बड़ा गजब कर दिया जो श्रोता देर से आये थे
 उन्हें कुर्सी पर ही खड़ा कर दिया
अपनी बिगड़ी हालात का ज्यादा व्यान क्या करना है

मुझे यह भी ध्यान नही रहे पता की कितने देर पढना है
एक जगह मैं पढता गया 1 घंटे दो घंटे .........
मुझे देरी का एहसास हुआ तो श्रोताओं से माफ़ी मांगी
माफ़ करना भाइयों आज मेरे हाथ में घडी नही थी
एक श्रोता बोला पीछे केलिन्डर लगा हुआ था वही देख लेता


बात हो गयी है काबिले गौर की
मुझे यह भी ध्यान नही रहे पता की अपनी ही पढ़ रहा हूँ या किसी और की
पूरे दिमाग में ही हेरा फेरी है
की जब कोई और पढता है पढता है और जमता है
तब लगता है यह कविता तो मेरी है'





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